न वो सो सके जो दूर थे न वो सो सके जो पास
न वो सो सके जो जो bahar थे न वो सो सके जो अन्दर
न वो सो सके जो यह सोच रहे थे की हम सो रहे हैं
उधि थी एक अंधी
उदा था एक जन सह्लब
था हर हिन्दुस्तानी के मनन में एक ही सवाल
क्यों १५ को पाई आज़ादी १६ को खोयी थी
क्यों एक बार फिर भारत मान रोई थी